मौत के बाद भी दूसरे के शरीर से देखेगा दुनिया
जांजगीर चांपा (सुघर गांव )। जिले के ग्राम पंचायत पचोरी निवासी पीलादाऊ सतनामी पिता धनसाय ने कोरबा मेडिकल कॉलेज को पहली बार देहदान के जरिए नेत्रदान किया है. इससे एमबीबीएस के छात्रों को चिकित्सा की पढ़ाई में मदद मिलेगी।
स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, कोरबा को ग्राम पंचायत पचोरी के वरिष्ठ नागरिक पीलादाऊ सतनामी के निधन के बाद अपने पूरे शरीर को उनके परिजनों ने डोनेट कर दिया ताकि उनसे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर रिसर्च कर सकें या फिर उनके अंग दूसरों के काम आ सकें. हालांकि भारत में मृत्यु उपरांत देहदान बहुत कम है, उसे लेकर जागरूकता भी नहीं है. वैसे इस दान को महादान कहा गया है।
हमारे देश में महर्षि दधिची हुए हैं, जिन्होंने देवताओं के कल्याण के लिए ना केवल अपना देह त्याग किया था बल्कि इस देह का इस्तेमाल करने की अनुमति भी उन्हें दी थी. मृत्यु के बाद देवताओं ने उनकी अस्थियों से वज्र बनाया और इससे वो असुरों का संहार कर सके. दरअसल मृत्यु के बाद हमारे शरीर के अंगों से बहुत से लोगों का कल्याण हो सकता है, लिहाजा अंगदान अब महादान कहा जाता है. हमारे कुछ शीर्ष नेताओं ने अपने निधन के बाद अपने शरीर को मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को दान में दे दिया, जिससे ना केवल जरूरतमंदों को उनके अंग लगाए जा सकें बल्कि ये मेडिकल रिसर्च में भी काम आ सके।
हालांकि हमारे देश में मृत्यु के उपरांत देहदान बहुत कम किया जाता है लेकिन ये समय की जरूरत है।
“सबसे बड़ा दान है देहदान, स्टूडेंट्स को मिलेगी सहायता” : कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन डॉ. ने कहा, देहदान दुनिया का सबसे बड़ा दान होता है. सेवाभावी वरिष्ठ नागरिक पीलादाऊ सतनामी ने जो संकल्प लिया था, उसे पूर्ण किया है. इससे मेडिकल कॉलेज कोरबा में अध्यनरत मेडिकल के छात्रों को सहायता मिलेगी।







